हैंस क्रिश्चियन एंडरसन · 1837 · 3 मिनट का वीडियो
बादशाह के नए कपड़े (The Emperor's New Clothes) – कहानी का हिंदी सारांश और सीख
जिस आदमी के पास सब कुछ है, वह एक ऐसा सूट ख़रीदता है जो है ही नहीं। दस हज़ार लोग उसे देखने का नाटक करते हैं। सच बोलने के लिए एक बच्चा काफ़ी है।
मूल कहानी का सारांश
एक बादशाह को नए कपड़ों से ज़्यादा किसी चीज़ का शौक़ नहीं। दिन के हर घंटे के लिए उसके पास अलग पोशाक है।
दो ठग जुलाहे बनकर आते हैं। वे कहते हैं कि वे दुनिया का सबसे सुंदर कपड़ा बुन सकते हैं, जिसकी एक जादुई ख़ासियत है: वह उस आदमी को दिखाई नहीं देता जो अपने ओहदे के लायक़ नहीं या बेहद बेवक़ूफ़ है। बादशाह उन्हें ढेर सारा पैसा देता है। वे ख़ाली करघे लगाते हैं, बढ़िया रेशम और सोने का धागा मँगवाते हैं और सब अपने थैलों में भर लेते हैं।
बादशाह अपने ईमानदार बूढ़े मंत्री को काम देखने भेजता है। मंत्री को कुछ नहीं दिखता, पर बेवक़ूफ़ या नालायक़ कहलाने के डर से वह कपड़े की तारीफ़ करता है। दूसरा अफ़सर भी यही करता है। आख़िर बादशाह ख़ुद जाता है, उसे भी कुछ नहीं दिखता, और मानने के बजाय वह कपड़े को शानदार बता देता है।
ठग शाही जुलूस के लिए बादशाह को "नए कपड़े" पहनाते हैं। भीड़ तालियाँ बजाती है और पोशाक की तारीफ़ करती है, क्योंकि कोई बेवक़ूफ़ नहीं कहलाना चाहता।
तभी एक छोटा बच्चा कहता है, "पर इन्होंने तो कुछ पहना ही नहीं!" बात भीड़ में फैलती है और सब यही कहने लगते हैं। बादशाह काँप जाता है, उसे लगता है कि वे सही हैं। पर वह तय करता है कि जुलूस तो चलेगा, और पहले से भी ज़्यादा अकड़कर चलता रहता है। उसके दरबारी उस पल्लू को थामे पीछे चलते हैं जो है ही नहीं।
हमारा वीडियो कैसे अलग है
हमारे वीडियो में बादशाह एक अरबपति है: चालीस कंपनियाँ, तीन द्वीप और दो हज़ार सूट। दो "फ़ाउंडर" उसे बारह मिलियन एडवांस, ऊपर से मंथली सब्सक्रिप्शन और "क्लाउड फ़ीस" में एक अदृश्य सूट बेचते हैं। जुलूस है एक कीनोट, जिसे चार करोड़ लोग लाइव देख रहे हैं।
अंत एंडरसन वाला ही है: उसे पता है कि लोग सही हैं, फिर भी वह चलता रहता है।
पात्र
- बादशाह
- घमंडी, अमीर, और बेवक़ूफ़ होने से ज़्यादा बेवक़ूफ़ दिखने से डरता है।
- दो ठग
- जानते हैं कि शर्मिंदगी का डर आँखों से ज़्यादा ताक़तवर है।
- मंत्री और भीड़
- हर वो इंसान जिसे कुछ नहीं दिखता और जो उल्टा कहता है।
- बच्चा
- अकेला जिसके पास सच बोलने में खोने को कुछ नहीं।
कहानी के विषय
घमंड
बादशाह का दिखावे का शौक़ ही ठगों का हथियार बन जाता है।
भीड़ का दबाव
सबको एक ही चीज़ दिखती है और कोई नहीं बोलता, क्योंकि हर किसी को लगता है कि बस वही अकेला है।
सच
जिस बच्चे की कोई इज़्ज़त दाँव पर नहीं, वही सबके मन की बात कह देता है।
कहानी के अंत का मतलब
बादशाह समझ जाता है कि भीड़ सही है, फिर भी जुलूस जारी रखता है, क्योंकि ग़लती मानना उसे और भी शर्मनाक लगता है।
यही आख़िरी बात कहानी को तीखा बनाती है: सच सुन लेने से लोग रास्ता नहीं बदलते, जब उनका घमंड दाँव पर हो।
छात्रों के सवाल
'बादशाह के नए कपड़े' कहानी की सीख क्या है?
घमंड या बेवक़ूफ़ दिखने के डर से जो दिख रहा है उसे कहने से मत रुको। और भीड़ के मान लेने से कोई बात सच नहीं हो जाती।
किसने कहा कि बादशाह ने कुछ नहीं पहना?
भीड़ में एक छोटे बच्चे ने।
पहले कोई क्यों नहीं बोला?
ठगों ने कहा था कि कपड़ा बेवक़ूफ़ों और नालायक़ लोगों को नहीं दिखता, इसलिए सब यह मानने से डरते थे कि उन्हें कुछ नहीं दिख रहा।
मूल कहानी: बादशाह के नए कपड़े, हैंस क्रिश्चियन एंडरसन (1837).
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चेख़व, पो, प्रेमचंद और बाक़ी उस्तादों की कहानियाँ, बिल्लियों की एक मंडली के अभिनय में।
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