एंटन चेख़व · 1889 · 4 मिनट का वीडियो

शर्त (The Bet) – एंटन चेख़व की कहानी का सारांश, अर्थ और अंत

एक नौजवान वकील शर्त लगाता है कि वह 15 साल एक बंद कमरे में अकेला रह लेगा। एक अमीर बैंकर कहता है, नहीं रह पाएगा। अंत किसी ने नहीं सोचा था।

मूल कहानी का सारांश

एक पार्टी में बहस छिड़ती है कि मौत की सज़ा ज़्यादा क्रूर है या उम्रक़ैद। अमीर बैंकर कहता है कि फाँसी बेहतर है। पच्चीस साल का एक वकील कहता है कि वह उम्रक़ैद चुनेगा, क्योंकि किसी भी तरह जीना, न जीने से अच्छा है।

बैंकर बीस लाख रूबल की शर्त लगाता है कि वकील पाँच साल भी अकेले क़ैद में नहीं रह पाएगा। वकील इसे पंद्रह साल कर देता है। 14 नवंबर 1870 की दोपहर से 14 नवंबर 1885 की दोपहर तक वह बैंकर के बग़ीचे की एक कोठरी में अकेला रहेगा। किताबें, संगीत, शराब, जो चाहे लिखकर माँग सकता है, पर किसी इंसान से मिल या बात नहीं कर सकता। दो मिनट पहले भी निकला तो शर्त हार जाएगा।

पहले साल वह अकेलेपन से परेशान रहता है, दिन-रात पियानो बजाता है और शराब-तंबाकू से इनकार करता है। दूसरे साल वह क्लासिक किताबें पढ़ता है। पाँचवें साल वह शराब माँगता है और ज़्यादातर बिस्तर पर पड़ा रहता है। छठे साल से भाषाएँ, दर्शन और इतिहास पढ़ता है और चार साल में छह सौ किताबें पढ़ डालता है। फिर धर्मग्रंथ, और आख़िरी सालों में कुछ भी: रसायन, बायरन, शेक्सपियर, जैसे डूबता आदमी तिनका पकड़ता है।

उधर बैंकर सट्टे में लगभग सब कुछ गँवा देता है। बीस लाख देने का मतलब होगा बर्बादी। आख़िरी रात, रात तीन बजे, वह वकील को मारने कोठरी में घुसता है।

अंदर एक दुबला, बूढ़ा-सा आदमी मेज़ पर सो रहा है और पास में एक चिट्ठी है। उसमें वकील लिखता है कि किताबों ने उसे पूरी दुनिया दिखा दी और अब वह इस दुनिया की हर चीज़ से, पैसे से भी, नफ़रत करता है। इसे साबित करने के लिए वह तय समय से पाँच घंटे पहले निकलकर जानबूझकर शर्त हार जाएगा। बैंकर उसका सिर चूमता है, रोता है और लौट जाता है। सुबह वकील जा चुका होता है। बैंकर वह चिट्ठी अपनी तिजोरी में बंद कर देता है।

हमारा वीडियो कैसे अलग है

हमारे वीडियो में कहानी आज के ज़माने में है। बैरन प्लम बैंकर है, पिस्ता वकील, और क़ैद है एक सील बंद कमरा: एक फ़ोन, एक कटोरा, एक बंद दरवाज़ा। प्लम का पैसा क्रिप्टो, मीम स्टॉक और एक रॉकेट कंपनी में डूबता है।

बाक़ी सब चेख़व का ही है: छह सौ किताबें, रात तीन बजे की चोरी-छिपे एंट्री, चिट्ठी और पाँच घंटे।

पात्र

बैंकर (बैरन प्लम)
अमीर, घमंडी और पैसे को लेकर लापरवाह। मज़े में शर्त लगाता है और उससे बचने के लिए क़त्ल तक को तैयार हो जाता है।
वकील (पिस्ता)
जवान और अपनी बात पर अड़ा हुआ। पंद्रह साल की पढ़ाई उसे ऐसा इंसान बना देती है जिसे बैंकर की किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं।

कहानी के विषय

ज़िंदगी की क़ीमत

बहस यहीं से शुरू होती है कि क्या कैसी भी ज़िंदगी मौत से बेहतर है। वकील ज़िंदा तो रहता है, पर क्या वह ज़िंदगी जी पाया?

पैसा और लालच

बैंकर बिना सोचे बीस लाख दाँव पर लगाता है और फिर उन्हें बचाने के लिए क़त्ल की योजना बनाता है। जिसके पास पंद्रह साल कुछ नहीं था, वही पैसा ठुकरा देता है।

ज्ञान और अकेलापन

किताबें वकील को पूरी दुनिया देती हैं और उसी दुनिया से नफ़रत भी सिखा देती हैं। चेख़व यह फ़ैसला पाठक पर छोड़ते हैं कि वह समझदार हुआ या लोगों से कट गया।

कहानी के अंत का मतलब

वकील जानबूझकर शर्त हारता है। वह दिखाना चाहता है कि पैसा, और वह सब कुछ जिसके पीछे लोग भागते हैं, अब उसके लिए कुछ नहीं।

बैंकर बच तो जाता है, पर ख़ुश नहीं होता। उसे ख़ुद से पहले कभी इतनी घिन नहीं आई थी। जिस आदमी को वह पैसों के लिए मारने गया था, उसी ने पैसा ठुकरा दिया। चिट्ठी को तिजोरी में बंद करना बताता है कि उसे अब भी लोगों की बातों की ज़्यादा फ़िक्र है।

छात्रों के सवाल

वकील कितने साल क़ैद में रहा?

पंद्रह साल, 1870 से 1885 तक। बैंकर ने पहले पाँच साल कहे थे, वकील ने ख़ुद पंद्रह कर दिए।

वकील पाँच घंटे पहले क्यों निकल गया?

ताकि जानबूझकर शर्त हार जाए। उसकी चिट्ठी के मुताबिक़ अब उसे पैसे और दुनिया की चीज़ों से नफ़रत थी।

क्या बैंकर ने वकील को मार दिया?

नहीं। वह मारने गया था, पर चिट्ठी पढ़कर रोते हुए लौट आया। अगली सुबह वकील ख़ुद चला गया।

'शर्त' कहानी की सीख क्या है?

कोई एक सीधी सीख नहीं है। कहानी पूछती है कि क्या पैसा, किताबें या सिर्फ़ ज़िंदा रहना ही ज़िंदगी को क़ीमती बनाते हैं, और दिखाती है कि लालच एक आम आदमी को क़त्ल तक ले जा सकता है।

मूल कहानी: शर्त, एंटन चेख़व (1889).

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